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शासकीय योजना का लाभ पाकर किराना व्यवसायी बनी पवनकला सफलता की कहानी (कहानी सच्ची है)
सालाना हो रही है सवा लाख से अधिक की कमाई
देवास | 16-मई-2018
 
       शासन की महत्ती योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका योजना का लाभ उठाकर खातेगांव की पवनकला किराना व्यवसायी बन गई। छोटी-छोटी बचतों से एकत्रित राशि व योजना में मिली राशि का लाभ उठाकर उन्होंने छोटी सी किराना की दुकान शुरू की। धीरे-धीरे किराना का व्यवसाय चल निकला और आज वे सालाना एक लाख 36 हजार रुपए से अधिक की कमाई कर रही हैं। आजीविका योजना के स्व सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने अपने दिव्यांग पुत्र को आटा-चक्की भी लगवाई जिससे उनके पुत्र को गांव में ही रोजगार मिल गया।    पवनकला विकासखण्ड खातेगांव के ग्राम कुंडगांवखुर्द पंचायत मुरझाल से ताल्लुक रखती है। वे एक शिक्षित महिला है, किंतु परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर रही है। पवनकला स्व सहायता समूह से जुड़ने से पहले मजदूरी करके अपने परिवार के लालन-पालन में सहयोग प्रदान करती थी। लेकिन मजदूरी करके भी उनकी आर्थिक स्थिति नहीं सुधरी।
स्व सहायता समूह से जुड़कर कमाया मुनाफा
      पवनकला ने बताया कि म.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन विकासखण्ड खातेगांव ग्राम में ही समूह के बारे में साधारण सभा हुई तब उन्हें समूह के बारे में विस्तार पूर्ण जानकारी प्राप्त हुई तो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सांई स्व-सहायता समूह से जुड़ गई। वे बताती है कि बारह सूत्र का पालन करने से हमारे समूह को आजीविका मिशन के माध्यम से फण्ड प्राप्त हुआ। प्राप्त हुए फंड से उन्होंने किराना दुकान का संचालन प्रारंभ किया।
प्रतिदिन अच्छी हो रही है कमाई
        पवनकला ने बताया कि समूह की गतिविधियां अच्छी चलने लगी है। बाद में फिर ग्राम संगठन बनाया गया। स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने किराना व्यवसाय प्रारंभ किया। जिससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 376 रुपए, प्रतिमाह 11 हजार 300 रुपए तथा सालाना एक लाख 36 हजार रुपए की कमाई हो रही है। समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में कई उल्लेखनीय परिवर्तन आए, जिससे मजदूरी छोड़कर स्वरोजगार प्रारंभ हुआ तथा अपने दिव्यांग पुत्र को आटा-चक्की ग्राम में लगवा दी, जिससे उसे कामकाज के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़े। उन्होंने बताया कि अब उनके जीवन में खुशियों की बहार आ गई है।
किया जा रहा है स्व-सहायता समूह के रूप में संगठित
        उल्लेखनीय है कि ग्रामीण गरीब परिवारों में सामुदायिक संस्थाओं का विकासकर उन्हें आजीविका के स्थायी अवसर उपलब्ध करने एवं उनके आर्थिक एवं सामाजिक विकास को सुनिश्चित कराने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के रूप में वर्ष 2012 में पुर्नगठन किया गया। मिशन के अंतर्गत सभी ग्रामीण निर्धन परिवारों को स्व-सहायता समूह के रूप में संगठित किया जा रहा है। इन समूहों को आवश्यकतानुसार उच्च स्तरीय एवं गतिविधि आधारित फेडरेशन का गठन कर उन्हें सशक्त किया जाता है।
मुख्यमंत्री का मान रही है आभार
        पवनकला एवं समूह की अन्य महिलाएं स्वयं का रोजगार स्थापित होने से खुश हैं। वे सभी स्वावलंबी बनने पर मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान का हृदय से आभार मान रही हैं। साथ ही वे सभी जिला प्रशासन का भी आभार मान रही है कि उन्होंने शासन की इस महत्ती योजना से जोड़ा तथा उनकी आय में वृद्धि की। वे कहती हैं कि प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही जनहितैषी योजनाओं से सभी को लाभ मिल रहा है।        
(7 days ago)
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