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दक्षिणी गोलार्द्व का सबसे बड़ा खुला बाजार देखेंगे खरगोन के किसान "सफलता की कहानी"
शासन की विदेश अध्ययन यात्रा पर किसानों का दल आज होगा रवाना
खरगौन | 13-मई-2018
 
 
       मप्र शासन की कृषि नीति का मुल वाक्य है ’’खेती को लाभ का धंधा बनाया’’ इसके लिए किसानों की हर संभव मदद की जाए। तभी तो प्रदेश शासन द्वारा किसानहितैषी अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। इन योजनाओं और किसानों की मेहनत व सुझ-बुझ का ही परिणाम है कि प्रदेश को 5-5 बार कृषि के क्षेत्र में देश का सर्वोच्य सम्मान प्राप्त हुआ है। इसका अनुमान इस योजना से भी लगाया जा सकता है कि किसानों को नव नवीन तकनीकों का ज्ञान हो। इसके लिए मप्र शासन द्वारा किसानों को विदेश अध्ययन तक के लिए भेज रही है। मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा के तहत् 14 मई को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर किसानों के 2 दल प्रस्थान करेंगे। 20-20 सदस्ययी किसानों के दल में खरगोन के 3 किसान भी शामिल है। यह यात्रा 13 मई से 24 मई तक रहेंगी। इस दौरान 2 देशों के 10 शहरों में 15 से अधिक स्थानों पर शक्कर मीले, गन्ने की खेती, स्ट्रॉबेरी खेती, गेहूं फार्म, डेयरी फार्म, उद्यानिकी बाजार व बाग, कृषि व पशुचारी, रोबोटिक डेयरी और समुद्री जीव लॉईफ एक्वेरियम के अलावा इन देशों के किसानों से मुलाकात करवाई जाएगी। 11 दिनों की इस यात्रा में विदेशी किसान अपना प्रजेंटेशन दिखाकर भारतीय किसानों को नवीन तकनीकों से अवगत कराएंगे।
दल में खरगोन के उन्नत किसान भी है शामिल
      कृषि विकास विभाग की किसान विदेश अध्ययन यात्रा के तहत जिलें के 3 किसानों का चयन किया गया है। खरगोन कृषि विभाग के सहायक संचालक राधेश्याम बड़ोले बताया कि बेडि़या के चंद्रपालसिंह नैनसिंह, राहड़कोट (सनावद) के विजय हरिकरण पटेल और आलीबुजूर्ग के विपिन कुमार कैलाशचंद्र बर्वे को 11 दिवसीय यात्रा पर विदेश अध्ययन के लिए भेजा जा रहा है। इन तीनों ने अपनी छोटी सी कृषि भूमि होने के बावजूद कृषि की उन्नत तकनीकों को अपनाया और पहचान बनाई है। चंद्रपालसिंह को आत्मा योजनांतर्गत वर्ष 2012-13 में 25 हजार का  जिला स्तरीय सर्वोत्तम कृषक का पुरस्कार मिल चुका है। बेडि़या में इनके पास मात्र 1.41 हे. कृषि भूमि है। विजय पटेल के पास 1.679 हे. कृषि भूमि और विपिन के पास 0.328 हे. कृषि भूमि होने के बावजूद उन्होने कृषि को लाभ का धंधा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ये तीनों ही लघु सिमांत किसान है।
इन स्थानों पर जाएगा किसानों का दल
     यात्रा की शुरूआत ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन शहर से होगी। यहां किसान शक्कर मीलांे और गन्ने की खेती का अवलोकन करेंगे। वहीं स्थानीय किसानों से गन्ना उत्पादन की तकनीकों को प्रजेटेशन के माध्यम से जानेंगे। इस शहर में 100 से ज्यादा शक्कर की मीलें है। यहां के बाद मेलबर्न शहर जाएगे, जहां दक्षिणी गोलार्द्व के सबसे बड़े खुले बाजार ’’क्वीन विक्टोरिया मार्केट’’ का अवलोकन करेगें। इस बाजार में उद्यानिकी फसलों और बाग का अवलोकन कर फल व सब्जी के रखरखाव और उत्पादो के मुल्य की जानकारी प्रजेंटेशन के माध्यम से किसानों के द्वारा दी जाएगी। होर्शम शहर में गेहूं के बड़े-बड़े खेतों का अवलोकन व किसानों से चर्चा में गेहूं उत्पादन और प्रकिृया के बारे में जानेंगे। न्यूजीलैंड के जिलें वेकाटों में भेड़ पालन में श्वानों का उपयोग, मुर्गीपालन, पशुआहता व पशुचारागाह निर्माण तथा इनके व्यापार की विभिन्न गतिविधियों को देखेगें। वेटोमों जिलें में स्थापित शीप फॉर्मिंग फोरेस्ट्री और लाइमस्टोन क्षेत्र में कृषि की तकनीको के बारे में समझेगें। ऑकलैंड में मत्स्य पालन की तकनीको के बारें में समुद्री जीव जीवन एक्वेरियम ऑब्जरवेटरी का अवलोकन कराया जाएगा। यहीं के हेमिल्टन शहर में डेयरी फार्म और विभिन्न प्रजातियों के फार्म के बारे बतलाया जाएगा।
दुग्ध व्यवसाय की नई तकनीक रोबोटिक डेयरी के बारे में जानेंगे
    इस यात्रा का उद्देश्य विदेशों में कृषि के नवीन क्षेत्रों में उभरती नवीन तकनीको के समझना और भारतीयकरण कर उपयोग करना है। इसी सिलसिलें में गत वर्षो में दुग्द्य व्यवसाय में तेज गति से उभरे रोबोटिक डेयरी के पहलुओं का ऑस्ट्रेलिया के जीलोंग शहर में अवलोकन करेगे। जहां एक साथ 170 से अधिक गायों का रोबोट के माध्यम से दुध दोहन किया जाता है। यहां ऐसे 100 से अधिक फॉर्म हॉउस है, जिनमें से 12 डेयरी का अवलोकन करेंगे। यहां डेयरी के क्षेत्र में कार्य कर रहे किसानों के परिवारों से भी मुलाकात होगी। जिनसे दुध उत्पादन और बाजार मुल्य के बारे में भी जानेंगे। साथ ही ऑस्ट्रेलिया के दुग्द्य उद्योग की पुरी जानकारी स्लाईड के माध्यम से प्रस्तुत होगी।
किसानों के साथ वैज्ञानिक और नोडल अधिकारी होंगे
    भोपाल के कृषि विभाग में सहायक संचालक श्री आर के. वर्मा ने बताया कि 20-20 सदस्यों के 2 दलों के साथ 1-1 वैज्ञानिक और 1-1 नोडल अधिकारी भी किसानों साथ जाएंगे। इनमें जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. पवन अमृते और डॉ. अनिता बब्बर व नोडल अधिकारियों में कृषि संचालक मोहनलाल मीणा व सहायक संचालक अनंता दीवान साथ रहेंगे। कृषकों के दलों को दिल्ली हवाई अड्डे से प्रातः 9:30 को बोईग 9 डब्ल्यू 018 से सिंगापुर के लिए प्रस्थान करेंगे।
(10 days ago)
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