समाचार
|| जिले में 22 अप्रैल को होगा नेशनल लोक अदालत का आयोजन || राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्‍य श्री कानूनगो 23 को नीमच में || प्रधानमंत्री एक्‍सीलेंस अवार्ड का सीधा प्रसारण 21 को होगा || पक्का मकान बन जाने से खुश हैं खरगो बाई ‘सफलता की कहानी’ || जवाहर नवोदय चयन परीक्षा 21 अप्रैल को होगी || मुख्‍यमंत्री तीर्थदर्शन योजना तहत यात्रा आवेदन आमंत्रित || नीमच में 3 लाख 22 हजार 124 श्रमिकों का पंजीयन || अनुसूचित जाति सलाहकार समिति की बैठक 26 को || जिला विकास समन्‍वय और निगरानी समिति दिशा की बैठक 25 को || सिविल सर्विस डे पर आज 20 अप्रैल को कार्यशाला का आयोजन
अन्य ख़बरें
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के अन्तर्गत जिला स्तरीय किसान सम्मेलन आयोजित
ऊर्जा मंत्री श्री जैन ने किसानों का फूलों से स्वागत किया, किसानों ने शाजापुर से मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा
उज्जैन | 16-अप्रैल-2018
 
 
 
   सोमवार को मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के अन्तर्गत कृषि उपज मंडी के प्रांगण में जिला स्तरीय किसान सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन थे। उन्होंने कार्यक्रम में पहुंचकर जिले की विभिन्न तहसीलों से आये किसानों का फूलों से स्वागत किया। इसके अलावा मंच से प्रतीकात्मक रूप से पांच किसानों का साफा बांधकर सम्मान किया गया। इस दौरान सांसद डॉ.चिन्तामणि मालवीय, महिदपुर विधायक श्री बहादुरसिंह चौहान, घट्टिया के विधायक श्री सतीश मालवीय, कृषि उपज मंडी समिति के अध्यक्ष श्री बहादुरसिंह बोरमुंडला, श्री केशरसिंह पटेल, श्री कैलाश बोड़ाना, उप संचालक कृषि श्री सीएल केवड़ा एवं अन्य अधिकारी तथा कृषि वैज्ञानिक मौजूद थे।
    कृषि वैज्ञानिकों द्वारा इस दौरान किसानों के लिये एक कार्यशाला भी आयोजित की गई, जिसमें कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिये पारम्परिक कृषि के साथ-साथ पशुपालन और उद्यानिकी फसलों को भी बढ़ावा देने की बात कही गई। सोयाबीन में मेड़-नाली पद्धति से होने वाले लाभ के बारे में किसानों को विस्तार से बताया गया। उल्लेखनीय है कि इस पद्धति में अधिक वर्षा की स्थिति में पानी नालियों द्वारा खेत से बाहर निकाल दिया जाता है, जिस कारण पौधों के गिरने की संभावना कम होती है।
    जैविक खेती के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि पौधों के पोषण हेतु जैविक खाद जैसे- कम्पोस्ट खाद, नाडेप खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद, बायोगैस, स्लरी आदि का कृषक स्वयं अपने खेत पर उत्पादन कर उपयोग कर सकते हैं।
    समन्वित कीट प्रबंधन के बारे में जानकारी देते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि किसान तीन से चार वर्ष के अन्तराल पर खेतों में ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करें। कीट प्रबंधन हेतु प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग करें।
    इसके अलावा कार्यशाला में बताया गया कि कृषकों को अपने खेत की मिट्टी की जांच प्रत्येक तीन वर्षों में करानी चाहिये। साधारणत: गर्मी के समय (अप्रैल, मई, जून) में मिट्टी का नमूना एकत्रित करना चाहिये। पौधों को जीवनचक्र पूरा करने के लिये 17 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जिन्हें मिट्टी की जांच कर पता लगाया जा सकता है।
    कम लागत उन्नत तकनीकी के बारे में किसानों को बताया गया कि मृदा परीक्षण अनुशंसा के अनुसार उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना चाहिये। स्वयं के द्वारा तैयार बीज, देशी खाद एवं जैविक कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिये। बीज का स्वयं अंकुरण परीक्षण करना चाहिये तथा बीजोपचार करके ही बुवाई करनी चाहिये।
    अन्तवर्तीय फसलों के बारे में जानकारी दी गई कि इस खेती से फसलों का जोखिम कम होता है। एक फसल का नुकसान होने पर दूसरी फसल से लाभ प्राप्त किया जा सकता है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में अन्तवर्तीय फसलों को बढ़ावा देना चाहिये। जल्दी पकने वाली फसलों के साथ देर से पकने वाली फसलों की खेती करना चाहिये जैसे- सोयाबीन के साथ अरहर। इसके अलावा अनाज वाली फसलों के साथ दलहनी फसलों की खेती करनी चाहिये जैसे- मक्का के साथ अरहर, मूंग, उड़द आदि।
    उर्वरक के अग्रिम उठाव के बारे में किसानों को जानकारी दी गई कि उनके द्वारा प्राथमिक कृषि सहकारी समिति से खरीफ के मौसम में एक मार्च से 31 मई के बीच तथा रबी मौसम में एक अगस्त से 15 सितम्बर के बीच उर्वरकों का अग्रिम उठाव किया जा सकता है। इससे किसानों को अतिरिक्त समय का ब्याज का भुगतान नहीं करना पड़ता है। उर्वरकों का उपयोग भूमि की मांग एवं फसल की आवश्यकता अनुसार अनुशंसित मात्रा में करना चाहिये।
    उप संचालक कृषि श्री सीएल केवड़ा ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए कहा कि पिछले साल किसानों द्वारा वर्ष 2016-17 में जो गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य के अन्तर्गत बेचा गया था, उसमें 200 रूपये प्रति क्विंटल के माध्यम से प्रदेश के 10 लाख 21 हजार किसानों के बैंक खाते में 1669 करोड़ रूपये की राशि का भुगतान आज एक क्लिक के माध्यम से मुख्यमंत्री के द्वारा कर दिया जायेगा।
    श्री बहादुरसिंह बोरमुंडला ने कहा कि प्रदेश की सरकार को किसानों की सदैव चिन्ता रहती है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किसानों के लिये किसानों के लिये सदैव कल्याणकारी योजनाएं बनाई हैं और आगे भी इस पर निरन्तर काम किया जायेगा।
    सांसद डॉ.चिन्तामणि मालवीय ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चौहान किसानों की बेहतरी के लिये सदैव प्रयासरत रहते हैं। यह सरकार किसानों की सरकार है। जब भी किसानों के हित की बात होती है, तो मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। इसके पश्चात शाजापुर से मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण एलईडी स्क्रीन पर अतिथियों और किसानों द्वारा देखा गया।
 
(3 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
मार्चअप्रैल 2018मई
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
2627282930311
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30123456

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer