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नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम-2011 प्रभावशील
वंचित समूह के 10 लाख बच्चों को स्कूलों में मिला नि:शुल्क प्रवेश
रतलाम | 07-अप्रैल-2018
 
   प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग के बच्चों को कक्षा-1 में अथवा प्रथम प्रवेशित कक्षा में न्यूनतम 25 प्रतिशत सीटों पर नि:शुल्क प्रवेश दिलवाया जा रहा है। अब तक प्रदेश में 10 लाख बच्चों को इसका लाभ दिलवाया जा चुका है। वर्ष 2018-19 में इसके लिये स्कूल शिक्षा विभाग के बजट में 350 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
   प्रदेश में वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग के बच्चों की नि:शुल्क प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाने के मकसद से ऑनलाइन लाटरी के माध्यम से शैक्षणिक प्रवेश प्रक्रिया निर्धारित की गई है। प्रवेश की ऑनलाइन प्रक्रिया होने से कमजोर वर्ग के बच्चों को अच्छे स्कूलों में प्रवेश के बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं। पिछले शैक्षणिक सत्र 2017-18 में एक लाख 46 हजार बच्चों को निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश दिलवाया गया। प्रवेशित बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा की गई है।
   अधिनियम में फीस प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाया जा रहा है। अब आरटीआई के तहत नि:शुल्क अध्ययनरत बच्चों के आधार नम्बर पोर्टल पर दर्ज करवाये जा रहे हैं तथा बॉयोमेट्रिक मशीन से बच्चों के आधार सत्यापन की व्यवस्था पोर्टल पर की जा रही है। प्रदेश में नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के क्रियान्वयन के लिये राज्य सरकार ने नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम-2011 बनाये हैं। अधिनियम के अंतर्गत स्कूल संचालन के लिये शिक्षक और अधोसंरचना का न्यूनतम मापदण्ड निर्धारित किया गया है। अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित मापदण्ड पूरे होने पर ही निजी स्कूलों को मान्यता देने का प्रावधान रखा गया है। प्रदेश में निजी स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के लिये पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने की व्यवस्था की गई है।
(16 days ago)
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