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महाशिवरात्रि पर दिव्यांग रोशनी को मिला आगे बढ़ने का हौसला (सफलता की कहानी)
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बड़वानी | 14-फरवरी-2018
 
   
   महाशिवरात्रि, दिव्यांग रोशनी गहलोत के लिए यादगार बन गई। अब वह खुश है कि महाशिवरात्रि पर शासन से प्रसाद के रूप में मिले कैलीपर्स  से वह अपनी चाही गई मंजिल तक चल कर पहुंच जाएगी।
   बड़वानी जिले के ग्राम साली की रहवासी कुमारी रोशनी भी यू तो आम बच्चों के समान ही जन्मी थी। किंतु बचपन में पीठ पर हुई गठान के कारण वह दोनों पैरों से निःशक्त हो गई थी। जिसके कारण उन्हें चलने-फिरने, स्कूल तक आने- जाने के लिए अपने पिता के सहारे की आवश्यकता होने लगी थी। कक्षा बारहवीं में पढ़ रही, कुमारी रोशनी को आशा ग्राम संस्थान में संचालित ‘‘जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र‘‘ के माध्यम से महाशिवरात्रि के दिन दोनों पैरों के कैलीपर्स बनाकर पहनाए गए। जिसे पहनकर कुमारी रोशनी पहली बार अपने पिताजी के सहारे के बिना कुछ कदम ही सही, पर चली अवश्य।
   जिला दिव्यांग पुनर्वास संस्थान के विशेषज्ञों को विश्वास है कि थोड़ी सी प्रैक्टिस के पश्चात कुमारी रोशनी भी इन कैलिपर्स से उसी प्रकार चल सकेगी, जिस प्रकार एक  आम व्यक्ति चल-फिर सकता है।
   कुमारी रोशनी के पिता श्री कैलाश गहलोत भी शासन की योजना के तहत लगभग 19 हजार मूल्य के मिले इन निःशुल्क कैलीपर्स को पाकर खुश है। उन्हें विश्वास है कि उनकी पुत्री अब  इस कैलीपर्स के सहारे आगे की पढ़ाई जारी रख कर आत्मनिर्भर बन सकेगी।
(5 days ago)
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