समाचार
|| मध्यप्रदेश की शासकीय क्षेत्र की प्रथम इकाई "सफलता की कहानी" || मजदूरी करने वाली कमला बनी बांसकला की मास्टर ट्रेनर (सफलता की कहानी) || व्हॉट्सएप से भी प्रदाय किये जायेंगे प्रमाण पत्र || राज्य सूचना आयुक्त का आगमन 25 को || राज्यपाल श्रीमती पटेल ने किया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण || खजुराहो एयरपोर्ट से राज्यपाल श्रीमती पटेल सागर के लिये हुई रवाना || निःशुल्क मेघा आयुश शिविर 24 फरवरी को || अनुश्रवण समिति की बैठक 26 फरवरी को || आज आयेगे संभागायुक्त || जिला स्तरीय सलाहकार समीक्षा समिति की बैठक 27 फरवरी को
अन्य ख़बरें
समूह की संवेदनशील पहल, बोध बच्ची का सहारा बना स्व सहायता समूह "सफलता की कहानी"
‘‘मां की ममता, पिता का दुलार समूह ने दिया लक्ष्मी को संस्कार‘‘
अनुपपुर | 12-फरवरी-2018
 
 
   जिसका कोई नही उसका भगवान होता है, यह कहते तो सभी को सुना है पर ग्राम उमरगुहान के आरती स्वसहायता समूह की दीदियो ने इसे चरितार्थ करके ममता और प्यार की मिशाल कायम की है।
   ग्राम उमरगुहान, ग्राम पंचायत पोडकी, संकुल भेजरी, विकासखण्ड पुष्पराजगढ़ जिला अनूपपुर में दलपत सिह का परिवार पत्नि बसंता और बेटी लक्ष्मी के साथ निवास करता था। परिवार मजदूरी करके अपना जीवन यापन करता था, साथ ही बसंता आरती समूह की सदस्य भी थी। आवश्यकता पडने पर समूह से कर्ज लेकर अपनी जरूरते पूरा कर समूह का ऋण चुका देती थी, समूह पर उसे पूरा विश्वास था, वह समूह की प्रत्येक बैठक में हिस्सा लिया करती थी। समूह के सदस्य भी समूह के प्रति उसकी लगन को देख उसकी प्रशंसा करते थे।
   अचानक बंसता बीमार हो गई, बहुत इलाज कराया गया पर बंसता की मृत्यु हो गयी। उस समय बेटी लक्ष्मी 6 माह की थी। अब उसके पालन पोषण की जिम्मेदारी पिता दलपत पर आ गई, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, दो माह बाद पिता दलपत की भी मृत्यु हो गई। लक्ष्मी की परवरिश की जिम्मेदारी अब वृद्ध दादी के हाथों थी, पर वह आपनी अवस्था के करण स्वयं की भी देखभाल नही कर पा रही थी, 8 माह की बच्ची भूख प्यास से बिलखती रहती थी, स्थिति दिनो दिन बिगडती जा रही थी। समूह के सदस्यों को उनकी हालत देख बहुत दुख हो रहा था, समझ नही आ रहा था की करें भी तो क्या। अंततः समूह की बैठक में इस विषय पर चर्चा की गयी की यदि शीघ्र ही कोई निर्णय नही लिया गया तो मां बाप की तरह लक्ष्मी भी जिंदा नही बचेगी। समूह सदस्यों ने आखिरकार यह निर्णय लिया की सदस्य श्रीमति श्यामवती का बच्चा छोटा है, वह अपने बच्चे के साथ-साथ लक्ष्मी को भी मां का प्यार देगी और लक्ष्मी की परवरिश का पूरा खर्च समूह द्वारा उठाया जायेगा।
   अब लक्ष्मी 3 वर्ष की हो गयी है, वह आंगनवाडी जाने लगी है, समूह सदस्यों के घर खेलती रहती है, समूह सदस्य भी उसका ध्यान रखते हैं, वह सबकी लाडली हो गई है। समूह के सभी सदस्य मिलकर उसकी दादी के नाम से उसकी बचत जमा करते है अब उसकी बचत 2430 रू हो गयी है। आंगनवाडी से लाडली लक्ष्मी योजना का पंजीयन हो गया है, समूह के निर्यण अनुसार सुकन्या योजना हेतु प्रक्रिया की जा रही है।
   समूह की इस पहल से ग्राम में ही नही अन्य गामों में भी सभी  गरीब बच्चो एवं वृद्धो की परवरिश एवं योजनाओं से लाभ दिलाने की चर्चा समूह में प्राथमिकता से की जाने लगी  है।
 
(9 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
जनवरीफरवरी 2018मार्च
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
2930311234
567891011
12131415161718
19202122232425
2627281234
567891011

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer