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आजीविका गतिविधियां बनी हिरौदिया का सहारा (सफलता की कहानी)
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अनुपपुर | 08-फरवरी-2018
 
   ग्राम पड़ौर, विकासखण्ड अनूपपुर की रहने वाली हिरौदिया एक गरीब परिवार की सदस्य थी। पैतृक रूप से खेती व मजदूरी से परिवार का गुजारा हो रहा था। किसी तरह से काम चल रहा था, आय जितनी होती थी रोजमर्रा की जरूरतों मे खर्च हो जाया करती थी, जीवन में कभी-कभी अपनी जरुरतों को पूरा करनें के लिए दूसरे से उधार लेकर काम चलाने की नौबत आती ही रहती थी। कई बार समय पर उधार भी नही मिल पाता था जिससे रोजमर्रा की चीजों की पूर्ति कर पाना भी मुश्किल हो रहा था।
   आजीविका मिशन द्वारा ग्राम में समूह अवधारणा व प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण दिया गया, जिससें उनमें एक नई सोच व उमंग का संचार हुआ। स्व सहायता समूह के सदस्य नई ऊर्जा के साथ समूह से जुड़कर कार्य करने लगे। गरीबी से निजात पाने के लिए हिरौदिया ने पहली बार मुर्गी पालन व्यवसाय हेतु दुर्गा स्व सहायता समूह से रुपये 10000/- का ऋण लेकर का कार्य प्रारम्भ किया, मुर्गी पालन का काम वरदान साबित हुआ और एक नियमित आय का स्त्रोत मिला हिरौदिया के परिवार को। नियमित आय होने से बचत की भावना का विकास हुआ और हिरौदिया समूह में बचत करने के साथ-साथ अलग से भी कुछ पैसे बचाने लगी। मुर्गी पालन व्यवसाय से बचत कर अपने पैतृक जमीन पर खुद का बोरवेल कराया, जिससे आय का एक अन्य माध्यम सब्जी उत्पादन बना, अब प्रतिदिन सब्जी बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहा रहा है हिरौदिया का परिवार।
   आर्थिक रूप से बेहतर स्थिति में आने से ग्राम में उनकी मान प्रतिष्ठा भी बढ़ी और आजीविका गतिविधियों से परिवार की सामाजिक व आर्थिक तरक्की का रास्ता सुदृढ़ हुआ। विभिन्न आजीविका गतिविधियों से प्रतिमाह रू 12000/- की आय अर्जित करने वाले इस परिवार को अब अपनी जरुरतों को पूरा करने के लिए दूसरों से उधार नही मांगना पड़ता। आज हिरौदिया के बच्चे निजी स्कूल मे अध्ययनरत है जिससे उनका परिवार बहुत खुश है। भविष्य में अपने बच्चों को पढ़ाकर नौकरी दिलवाना व स्वयं का पक्का मकान बनाने की योजना भी है, कल तक हिरौदिया के पास सोच नही थी, आज उसके पास सोच है, स्वयं का सपना पूरा करने का जूनून व खुद का व्यवसाय है।
(107 days ago)
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