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आपदा प्रबंधन में सभी विभागो की भूमिका महत्वपूर्ण - जिला कमांडेंट
चित्रकूट के सती अनुसुईया घाट मे आपदा प्रबंधन अभ्यास सम्पन्न
सतना | 31-जनवरी-2018
 
 
    जिला स्तर पर प्राकृतिक एवं मानव जनित खतरो से निपटने की तैयारी को सुदृढ करने के लिये आपदा प्रबंधन का अभ्यास (मॉक एक्सरसाईज) और कार्यशाला का आयोजन चित्रकूट में बुधवार को सती अनुसुईया घाट के किनारे किया गया। किसी भी प्रकार की आपदा के दौरान आपातकाल की स्थिति सें निपटने के उपाय मॉक अभ्यास के दौरान बताये गये। कार्यशाला का शुभारंभ एस.डी.एम. मझगवां एल.एल.अहिरवार और आपदा प्रबंधन प्रभारी डिप्टी कलेक्टर ए.पी.द्विवेदी और डिस्ट्रिक्ट कमांडेट होमगार्ड विनय कैथवास ने दीप प्रज्जलन कर किया। इस मौके पर एस.डी.एम. रामपुर बघेलान कमलेश पुरी, महाप्रबंधक उद्योग अनिल बरसैया, सहायक संचालक महिला बाल विकास आकंक्षा मरावी, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन श्री पटेल, एस.डी.ओ. फारेस्ट जी.पी.तिवारी, जिला सलाहकार आपदा प्रबंधन सुनील श्रीवास्तव, अभिषेक मिश्रा, तहसीलदार जीतेन्द्र वर्मा, आर.एन.खरे, सी.डी.पी.ओ. संजय उर्मलिया भी उपस्थित थे।
    सती अनुसुईयां आश्रम के हाल में आयोजित आपदा प्रबंधन अभ्यास की कार्यशाला में डिस्ट्रिक्ट कमांडेट होमगार्ड विनय कैथवास ने कहा कि आपदा प्रबंधन में सभी विभागो की महत्वपूर्ण भूमिका है। जिले में प्राकृतिक एवं मानव जनित खतरो से निपटने के लिये जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन प्लान तैयार किया गया है। उन्होने बताया कि सतना जिले में प्रमुख रूप से भीडभाड क्षेत्र मे संभावित भगदड मैहर मंदिर और चित्रकूट के आसपास लगने वाले मेले मे आने वाले लाखो की संख्या मे जनसमूह को नियत्रंण एवं बाढ संभावित क्षेत्र में बाढ इत्यादि की आपदाए ही संभावित हो सकती है। उन्होने आपदा प्रबंधन से निपटने उपयोग की जाने वाली सामग्री एवं उपकरणो के बारे मे विस्तार से जानकारी दी। उन्होने बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति मे सहायता के लिये टोल फ्री नम्बर-1079 या 100 डायल पर सम्पर्क किया जा सकता है। एस.डी.एम. एल.एल.अहिरवार ने भीड प्रबंधन की प्लानिंग और व्यवस्थाओ के संबंध में जानकारी देते हुये कहा कि आपदा के उपरांत भी स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास तथा पशु चिकित्सा विभाग लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग आदि की जिम्मेदारिया और अधिक बढ जाती है। डिप्टी कलेक्टर ए.पी.द्विवेदी ने चित्रकूट क्षेत्र में दीपावली और अमावस्या मेला के दृष्टिगत की जाने वाली व्यवस्थाओ और संभावित आपदा प्रबंधन के प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। एस.डी.एम. कमलेश पुरी ने कहा कि आपदा प्रबंधन के समय प्रतिक्रियात्मक प्रबंधो की शीघ्रता और अनुकूलता आपदा प्रबंधन के असर को कम कर देती है। जिला सलाहकार सुनील श्रीवास्तव और अभिषेक मिश्रा ने आपदा प्रबंधन के उपायो की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। कार्यशाला में भूंकप आग और बाढ से सुरक्षा के उपायो के संबंध में विस्तापूर्वक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला के उपरांत सभी संबंधित विभागो के अधिकारियो और होमगार्ड तथा पुलिस के अमले द्वारा अनुसुईया घाट पर मंदाकिनी नदी में बचाव उपकरणो का प्रर्दषन कर आपदा प्रबंधन का अभ्यास भी किया। तहसीलदार जीतेन्द्र वर्मा ने कार्यशाला और आपदा प्रबंधन और अभ्यास के उद्देश्यो पर प्रकाश डाला।
 
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