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उद्यानिकी फसलो ने दलसिंह को दिखाई विकास की दिशा (सफलता की कहानी)
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झाबुआ | 14-जनवरी-2018
 
   
 
   गुजरात में जाकर मजदूरी करने वाले दलसिंग पिता नाना निवासी ग्राम समोई ब्लाक राणापुर ने अब उद्यानिकी फसलो के उत्पादन का प्रशिक्षण लेकर विकास की रफतार पकड़ ली है। वैज्ञानिक तकनीको और शासकीय अनुदान का उपयोग एक छोटे कृषक को भी बड़ा बना देता है एक छोटा सा कृषक जिसके पास भूमि तो है लेकिन तकनीको के अभाव एवं संसाधन सीमित होने से वह कड़ी मेहनत के बाद भी अपनी आय में वृद्धि नहीं कर पाता है,किन्तु जब उसी कृषक को वैज्ञानिक तकनीकों और शासकीय अनुदान का लाभ दिया जाता है,तो वह विकास की अग्रिम पंक्ति में आ जाता है। ऐसा ही हुआ जिले के गुजरात में जाकर मजदूरी करने वाले 6-7 हजार वार्षिक कमाने वाले दलसिंग पिता नाना के साथ  वैज्ञानिक तकनिकी एवं ड्रीप सिंचाई का उपयोग कर कम पानी होने के बाद भी दलसिंग ने अपने एक एकड़ खेत में टमाटर की फसल लगाई एवं 60 हजार रूपये की कमाई की। प्राप्त आमदनी के बाद दलसिंग ने खेती करने का ही प्लान बना लिया। अब वह गुजरात जाने की बजाय अपने खेत में ही और अधिक उद्यानिकी फसले लगाकर आय अर्जित करना चाहता है जिससे परिवार का अच्छे से विकास हो सके।
     झाबुआ जिले के राणापुर ब्लाक के ग्राम समोई में रहने वाले कृषक श्री दलसिंग ने चर्चा के दौरान बताया कि उसके पास सिंचाई के लिये एक कुआ थां जिससे गेहूँ चने की फसल की सिंचाई भी अच्छे से नहीं हो पाती थी। इस वजह से उसे सह परिवार मजदूरी के लिये गुजरात जाना पडता था। गांव से पलायन की वजह से बच्चो की शिक्षा भी नहीं हो पा रही थी। फिर उन्होने उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के सम्पर्क में आने के बाद शासन से ड्रीप सिंचाई सिस्टम एवं फल सब्जी उत्पादन का तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त किया। कृषि भूमि से पारंपरिक फसल उत्पादन से प्रतिवर्ष होने वाली आय 6-7 हजार को बढ़ाकर 60 हजार रूपये तक प्रतिवर्ष कर लिया। बच्चो की शिक्षा भी अच्छे निजी स्कूल में करवा रहे है।
     अपनी कृषि भूमि में उद्यानिकी विभाग के माध्यम से ड्रीप सिस्टम लगाया एवं शासन से अनुदान एवं हार्टिकल्चर फसल उत्पादन का प्रशिक्षण प्राप्त कर उद्यानिकी फसल गोभी, बैंगन, टमाटर, इत्यादि फसल लगाई। इससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई। ड्रीप इरीगेशन सिस्टम लगाने से पहले वह सिर्फ खरीफ की ही फसल कर पाते थे। वह अपने खेत में गेहूँ चना बोते थे, लेकिन सिंचाई के लिए पानी की कमी की वजह से उत्पादन नहीं हो पाता था। आमदनी बढ़ने से दलसिंग ने अब अपने खेत का विकास करने सिंचाई के लिये ट्यूबवेल लगाने एवं पडी हुई बंजर भूमि को भी कृषि योग्य बनाकर ड्रीप इरीगेशन सिस्टम लगाने की योजना बनाई है। ताकि वे अपना आर्थिक विकास अच्छे से कर पाये एवं बच्चो की शिक्षा भी अच्छे निजी स्कूल में करवा पाये।
(3 days ago)
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