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स्व सहायता समूह से जीवन में आयीं खुशहाली "सफलता की कहानी"
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सागर | 08-जनवरी-2018
 
 
    सागर जिले के केसली विकासखण्ड के ग्राम सोनपुर महिला स्व-सहायता समूह से जुडी श्रीमति प्रकाशरानी गौड ने कभी नही सोचा था कि उनके दरवाजे खुद का ट्रैक्टर खडा होगा। दो कमरो के कच्चे घर में अपने 70-80 पशुओं के साथ रहने वाली प्रकाशरानी बमुश्किल 15 लीटर दूध का प्रतिदिन उत्पादन कर पाती थी। 3.5 एकड की असंचित खेती में उनके पति बडेलाल धान, गेहूं की खेती करके अपने 04 बच्चो का पेट पालते थे। दूध विक्रय के लिये कोई स्थायी व्यवस्था नही होने के कारण घी बनाकर बेचना एकमात्र विकल्प था। विकासखण्ड के बाजार में जाकर स्थानीय व्यापारियों को 200-250 रूपये किलो घी बेचकर पूरे माह के दूध के उत्पादन से लगभग 2000 रू की अतिरिक्त आमदनी घर आ पाती थी। पूर्व में डीपीआईपी के द्वारा स्थापित बीएमसी से बडेलाल ने जुड कर अपना दूध खपाना शुरू किया। प्रकाशरानी ने समूह की सदस्यो को दूध उत्पादन को घी बनाकर बेचने से बेहतर बीएमसी में दूध बेचने का रास्ता दिखाया। बडेलाल ने अपने गांव में दुग्ध खरीदी केन्द्र चालू किया और रोजाना 60-70 लीटर दूध बीएमसी को भेजना शुरू कर दिया। दूध के खरीदी केन्द्र स्थापित हो जाने के कारण गांव के दूसरे किसानो ने भी पशुपालन को बेहतर बनाना शुरू किया। वे अच्छी नस्ल के दुधारू पशु खरीदने लगे। खुद प्रकाशरानी ने 80 मबेशियों की फौज को घटाकर एक मुर्रा, दो देशी भैंसे ओर तीन अच्छी गाय खरीद ली। प्रतिदिन 30 लीटर दूध का उत्पादन शुरू हो गया। बडेलाल ने अपनी बडी हुई आमदनी से खेती को सुधारने का प्रस्ताव अपनी पत्नि के सामने रखा। सबसे पहले खेत में बोरिंग करायी गयी, फिर एक कुआं और तैयार कराया गया। 04 बिजली पंप खरीदे पर बिजली नही होने की दशा में बाद में एक डीजल पंप भी ले लिया गया। अब उनके खेतो में धान, गेहूं के साथ आलू, प्याज, लेहसुन, लौकी, गाजर, हल्दी, मौसमी सब्जियां बोयी जाने लगी। सब्जियों से मिली आमदनी में उन्होने पहले अधिया पर खेती ली, बाद में 10 एकड जमीन सब्जी, बरसीन, गेहूं के लिये खरीद ली। पूरी खेती के प्रबंधन के लिये अब उन्हे ट्रेक्टर की आवश्यकता थी। बीएमसी से आने वाली रकम, खेती की रकम के कारण बैंक में उनकी साख अच्छी थी। उन्हे खुशी-खुशी बैंक से ट्रेक्टर फायनेंसिंग हो गयी। प्रकाशरानी स्वयं निरअक्षर है परंतु उनका सपना था कि वे अपने बच्चो को पढाई में कोई कसर न रखे, यही कारण है कि उनके शिक्षक बेटे की पत्नि स्वास्थ्य सेविका है और तीनो बेटियां अपनी ससुराल में खुशहाल है। अब कैसा लगता है पूछे जाने पर प्रकाशरानी स्थानीय भाषा में कहती है - अरे मर गय, गोबर पटकत-पटकत का पतो हति कै, अच्छे ढोर पालो मुतको दूध मिल है, लिडधार पाले से कछु नई होत।
 
(8 days ago)
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