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मूलचंद ने केले की खेती कर दिखाई नई राह
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बालाघाट | 03-जनवरी-2018
 
 
    बालाघाट जिले में किसानों द्वारा धान की खेती की जाती है। लेकिन बालाघाट विकासखंड के ग्राम नरसिंगा के किसान मूलचंद गजभिये ने केले की खेती कर क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए एक नई राह दिखाई है। मूलचंद ने अपने 40 डिसमिल खेत में पहली बार केले की फसल लगाया है और इससे उसे लगभग 4 लाख रुपये की आय होने का अनुमान है।
    मूलचंद गजभिये के पास खेती की अधिक जमीन नहीं है। थोड़ी सी खेती की जमीन में वह धान की खेती करता था। लेकिन धान की खेती में लागत अधिक होने के कारण ले देकर हिसाब बराबर हो जाता था। कम खेती में अधिक लाभ कमाने की चाहत में एक दिन उसकी मुलाकात उद्यान विस्तार अधिकारी श्री शेरकू हरिनखेड़े से हो गई। उन्होंने मूलचंद को सलाह दी कि वह केले की खेती को अच्छे से करेगा तो उसे निश्चित रूप से भारी मुनाफा होगा।
    मूलचंद ने अपनी 40 डिसमिल खेती में 20 जून 2017 को टीसू कल्चर, जी-09 प्रजाति के केले के 600 पौधे लगाये है। इसमें से 50 पौधे मर गये है, लेकिन वर्तमान में 550 पौधे सही सलामत है और कुछ दिनों में उनमें केले लगने लगेंगें। मूलचंद ने बताया कि उसने केले की फसल लगाने में लगभग 60 हजार रुपये की राशि खर्च की है। केले की फसल तैयार होने पर उसे प्रति पौधा 30 किलोग्राम तक केले मिलने का अनुमान है और यह केले 25 रुपये प्रति किलो के दाम में बिक जायेंगें। मूलचंद ने अपने केले के खेत के पास ही कुक्कुट पालन फार्म भी खोला है। इस फार्म से निकलने वाली मुर्गियों की बीट का उपयोग वह केले की फसल में खाद के रूप में कर रहा है। इससे केले के पौधे बहुत अच्छी स्थिति में है।
    उद्यान विस्तार अधिकारी श्री हरिनखेड़े ने बताया कि बालाघाट जिले में जितने केले की खपत होती है उसका 98 प्रतिशत बाहर से आता है। कुल खपत का केवल 02 प्रतिशत ही बालाघाट जिले से प्राप्त हो पाता है। इस जिले में केले की फसल से किसान कम समय में कम क्षेत्र में लगी फसल से अधिक मुनाफा कमा सकते है। मूलचंद को निश्चित रूप से 4 लाख रुपये से अधिक आय होने का अनुमान है। नरसिंगा एवं अन्य ग्रामों के दूसरे किसान भी मूलचंद की केले की फसल को देखकर अपने खेत में केला लगाने के लिए प्रेरित हो रहे है।
 
(13 days ago)
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