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मक्का के साथ भिण्डी और मिर्ची की अंतरवर्ती खेती से दुगना लाभ कमाया आदिवासी कृषक लल्लू सिंह ने "सफलता की कहानी"
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शहडोल | 02-जनवरी-2018
  
  शहडोल जिले के सोहागपुर विकास खण्ड के ग्राम खेतौली के आदिवासी किसान लल्लू सिंह ने अपनी सूझबूझ और मेहनत से मक्का के साथ भिण्डी और मिर्च की अंतरवर्ती कर खेती से दुगना लाभ कमाया है। कृषक श्री लल्लू सिंह ने बताया कि पहले वह पुराने तरीके से खेती किया करता था, जिससे मेहनत करने के बावजूद खेती से ज्यादा लाभ नहीं प्राप्त होता था। उन्होंने बतायाकि कृषि विभाग द्वारा आयोजित कृषक संगोष्ठी में वह उपस्थित हुआ जहां पर उन्हें कृषि वैज्ञानिकों द्वारा कृषि की नवीन तकनीक तथा विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों से अंतरवर्ती खेती की नई तकनीकी की जानकारी मिलने तथा शासन द्वारा किसानों के लिये संचालित कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी मिलने से उसने खेती के नये गुर सीखे तथा ग्रामीण कृषि विकास विस्तार अधिकारियों के सतत सम्पर्क में रहकर इनसे मिलने वाली तकनीकी सलाह एवं सुझाव से मैने वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने का निर्णय लिया। साथ ही कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओ के माध्यम से वर्मीकम्पोस्ट पिट और बायोगैस संयंत्र बनवाया तथा कृषि विभाग से शंकर प्रजाति का मक्का एनएमएच 803 बीच प्राप्त कर एक एकड़ में कतारों के बीच प्लास्टिक मल्च लगाकर मक्का की बोनी की साथ ही शासन की सहायता से ड्रिप सिंचाई पद्धति से मक्का की सिंचाई की। उन्होंने बताया कि अधिक पैदावार प्राप्त करने के लिये मैंने वर्मीकम्पोस्ट खाद तथा बायोगैस स्लरी का उपयोग किया साथ ही मक्का की दो कतारों के बीच में मिर्ची अथवा भिण्डी की बुवाई अंतरवर्ती फसल के रूप में किया। जिससे कि अतिरिक्त आय अर्जित हो सके। उन्होंने बताया कि मक्का के साथ भिण्डी एवं मिर्ची की अंतरवर्ती खेती करने में लगभग उसे 6 हजार रूपये की लागत लगी। उन्होंने बताया कि अंतरवर्ती खेती से उन्होंने 14 हजार रूपये का शुद्ध लाभ, मक्का की खेती से 6 हजार रूपये का शुद्ध लाभ, भिण्डी खेती से 4 हजार रूपये का शुद्ध लाभ अर्जित हुआ है। उन्होने बताया कि आगामी खरीफ सीजन में वह मक्का, भिण्डी और मिर्ची की खेती का रकवा बढ़ायेगा। किसान लल्लू सिंह ने बताया कि वह धान की श्री पद्धति की खेती का भी तकनीकी ज्ञान कृषि वैज्ञानिकों से ले रहा है तथा आगामी खरीफ सीजन में धान की श्री पद्धति से खेती भी करेगा।
 
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