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मिर्च ने घोली जिंदगी में मिठास ''''सफलता की कहानी''''
बेटी को पढने इटली भेजा किसान ने
हरदा | 31-दिसम्बर-2017
 
  
    
    छोटी हरदा के किसान संतोष जेवल्या की जिंदगी में मिर्ची की बदौलत मिठास घुल गई है। रबी सीजन में सालों साल से गेहूं की फसल लेने वाले संतोष को मिर्ची की खेती से अच्छी आमदनी मिल रही है। नतीजतन बारहवी तक पढे गांव के निवासी इस किसान ने बेटी को फैशन डिजायनिंग कोर्स के लिए इटली भेजा है। वे कहते हैं गेहूँ की परम्परागत फसल को बदलकर मिर्च लगाने का फैसला सही रहा। अपनी चैदह एकड़ की जमीन में संतोष ने सात साल पहले शासकीय सहायता से पाँच लाख रूपये की ड्रीप लगवाई थी। उन्हें दो लाख रूपये अनुदान प्राप्त हुआ। संतोष बताते है कि मिर्च लगाने का प्रति एकड़ लगभग डेढ लाख रूपये खर्च आता है और सभी खर्चे काटकर गिरी से गिरी हालत में डेढ लाख रूपये का मुनाफा हो जाता है। मैने तो पाँच लाख रूपये प्रति एकड़ का मुनाफा लिया है। संतोष गर्व से बतलाते है कि उन्होने एक एकड़ में पाँच सौ क्विंटल तक का मिर्च उत्पादन हासिल किया है। उन्होंने कहा कि सही मेहनत की जाए तो नुकसान का प्रश्न नहीं उठता। संतोष सुबह पाँच बजे से दस बजे तक पांच घंटे खेत में लगकर मेहनत करते है। नवंबर महीने में मिर्च की बेड और मल्चिंग पद्धति से बोवनी की गई थी। इन दिनों पौधों में हरी-हरी तीखी मिर्च की बहार आई हुई है। बड़ी मात्रा में प्रतिदिन मिर्च का उत्पादन मिल रहा है। किसान संतोष पटेल ने बताया सात सालों से वे मिर्च की खेती कर रहे हैं। पहली बार से ही अच्छा उत्पादन मिलने लगा। इसे देखते हुए वे हर साल चौदह एकड़ रकबे में मिर्च लगा रहे हैं। फसल में ड्रिप सिस्टम से पानी दिया जाता है। अब यह स्थिति है कि उन्हें मिर्च बेचने के लिये बाजार तलाशने की भी जरूरत नहीं पड़ती। मुम्बई, इन्दौर, भोपाल, खण्डवा के खरीददार खेत से ही लोड कर मिर्च ले जाते है। कई किसान मिर्च की खेती देखने के लिए दूर दूर से यहां पहुंच रहे हैं। पिछले कुछ सालों में जिले के कई किसानों ने उद्यानिकी खेती की ओर रुख किया है। उद्यानिकी विभाग के मुताबिक जिले में 875 एकड़ में किसान मिर्च की खेती कर रहे हैं। मिर्च से किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है जिससे रकबे में वृद्धि हो रही है।
(16 days ago)
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