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स्कूली बच्चों की गणवेश सिलाई से सीएलएफ को 30 लाख का लाभांश
1200 महिलायें जुडी हे सिलाई कार्य से
श्योपुर | 02-दिसम्बर-2017
 
   
   स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाओ द्वारा प्रशासन के सहयोग से गणवेश बनाने का काम बखुबी किया जा रहा है। श्योपुर जिले में 1200 महिलाओ द्वारा अगस्त माह से गणवेश बनाने का काम शुरू किया था जो अब तक चल रहा है तथा कई महिलाऐं इस कार्य से घर बैठकर लगभग 10000 रू प्रति माह कमा रही है। शाला प्रबंधन समितियो के माध्यम से 1 करोड 53 लाख रूपये की राशि संकूल स्तरीय फेडरेशन को प्राप्त हुई हे तथा 70 हजार के लगभग गणवेश समूहो की महिलाओ द्वारा प्रदाय की जा चुकी है। इस कार्य से संकुल स्तरीय संगठनो को लाभांश के रूप मे लगभग 30 लाख रूपये का लाभांश प्राप्त होगा जिसे स्वसहायता समूह चक्रीय पूजीं के रूप मे इस्तेमाल कर सकेगे। वही गणवेश सिलाई की मजदूरी के रूप मे महिलाओ को अब तक 1600000 रूपये की आय प्राप्त हुयी है।
   इस साल स्कूल में पढने वाले छात्र-छात्राओं के लिये गणवेश बनाने का कार्य स्वयं सहायता समूह की महिलाओ के परिसंघो को दिया गया है। म.प्र.डे.रा.ग्रा.आजीविका मिशन के दिशा निर्देशन में चल रहे स्वयं सहायता समूहो के 14 परिसंघ श्योपुर जिले में कार्यरत है। इन परिसंघो से 55000 महिलाये जुडी हुई है। आजीविका मिशन के जिला
   परियोजना प्रबंधक श्री एस.के. मुदगल ने बताया की मिशन का मुख्य उद्देश्य गांव में रहने वाले गरीब परिवारो की आजीविका बढाना है तथा इसके लिये स्वयं सहायता समूहो के माध्यम से समूह से जुडी महिलाओ के परिवार के सदस्यों को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोडकर परिवार की आय बढाने के प्रयास किये जा रहे है। विभिन्न प्रशिक्षण के माध्यम से महिला एवं उनके परिवार के सदस्यों का क्षमतावर्धन किया जा रहा है। इसी क्रम में इस वर्ष राज्य सरकार द्वारा स्कूल के छात्र-छात्राओं हेतु गणवेश के लिये स्वयं सहायता समूहो के माध्यम से गणवेश उपलब्ध कराने हेतु निर्णय लिया गया। जिला प्रशासन द्वारा जिले के स्वयं सहायता समूहो पर विश्वास जताते हुये जिले के सरकारी स्कूलो में नोनिहालो को गणवेश प्रदाय करने हेतु जिला स्तर पर गठित कमेटी द्वारा गणवेश प्रदाय करने का निर्णय लिया गया। श्योपुर जिले में अगस्त माह से गणवेश बनाने का काम महिलाओं द्वारा किया जा रहा है तथा गणवेश की पूर्ती हेतु कराहल, गोरस, मालीपुरा, कुहांजापुर, प्रेमसर, ढोटी, रायपुरा, हीरापुर, बरगंवा इत्यादि ग्रामीण क्षेत्रो में सिलाई केन्द्र ग्राम संगठन के माध्यम से संचालित किये जा रहा है। इसके साथ-साथ रघुनाथपुर, हीरापुरा, पांचो कॉलोनी, बेनीपुरा, मेवरा, राजपुरा, राधापुरा, डाबरसा, माकडोद, बिजरपुर इत्यादि ग्रामों के साथ-साथ श्योपुर नगरपालिका क्षेत्र में स्थापित स्वयं सहायता समूहो को गणवेश बनाने हेतु सिलाई के लिये कटा हुआ कपडा उपलब्ध कराया गया। लगभग 1200 महिलायें गणवेश बनाने के काम मे जुटी हुई है। इनमे से कई महिलायें तो 20000 रूपये से अधिक की राशि गणवेश बनाकर अपने परिवार के लिये प्राप्त कर चुकी है। ग्राम ढोंटी निवासी रामलीला, राजेश, राजकिरंता, कमलेश बाई, ग्राम बरगंवा निवासी सुनीता, हीरापुर निवासी कोकीला, सहनवाज, मालीपुरा निवासी रामधारा, प्रीती, गुड्डी, गायत्री, सीमा, बेनीपुरा निवासी सुनीता, शीला सहित कई अन्य महिलाओं द्वारा सैकडो की संख्या में गणवेश बनायी गयी। एनआरएलएम के श्री अनिल सक्सैना ने बताया की 30 नवम्बर तक सभी स्कूलो को गणवेश उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था एवं अधिकांश स्कूलो में गणवेश का वितरण कराया जा चुका है। गणवेश के लिये शाला प्रबंधन समितियो से अगस्त माह में लगभग 20 लाख, सितम्बर माह में 31 लाख, अक्टूबर में 53 लाख रूपये गणवेश बनाने के लिये प्राप्त हुये तथा नवम्बर माह में भी गणवेश बनाने के लिये राशि अब तक प्राप्त हो रही है। परियोजना प्रबंधक श्री मुदगल ने बताया की इस कार्य में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओ के साथ-साथ शहरी क्षेत्र की गरीब महिलाओ को भी जोडा गया तथा आजीविका मिशन द्वारा अपने उद्देश्य की पूर्ती की गयी। इस कार्य से संकुल स्तरीय संगठनो को लाभांश के रूप मे लगभग 30 लाख रूपये मिलेंगें इसके साथ-साथ गणवेश सिलने से महिलाओ को 1600000 रूपये अतिरिक्त आय प्राप्त होने से ग्रामीण परिवारो की आजीविका में वृद्धि हुयी है।
 
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