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सरकार और सभी जल संरक्षण संगठन मिल जुलकर बुंदेलखण्ड क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलेंगे- मुख्यमंत्री श्री चौहान
खजुराहो में दो दिवसीय राष्ट्रीय सूखामुक्त जल सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने हर नागरिक को पानी बचाने का संकल्प दिलाया, सागर संभाग के सभी जिलों में सभी तालाबों का सीमांकन कराया जाएगा, तालाबों की सीमाएं तय की जाएंगी, अतिक्रमण हटाएं जाएंगे, नए तालाब भी बनाए जाएंगे
सागर | 02-दिसम्बर-2017
 
 
  मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शासन, प्रशासन, समाज, जनप्रतिनिधि, जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले सभी संगठन मिल जुलकर बुंदेलखण्ड क्षेत्र में जल संरक्षण के कार्यों को अंजाम देंगे और इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलेंगे। मुख्यमत्री श्री चौहान शनिवार की दोपहर छतरपुर जिले के विश्वप्रसिद्ध धरोहर स्थल खजुराहो में बुंदेलखण्ड के विशेष संदर्भ में राष्ट्रीय सूखामुक्त जल सम्मेलन के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। तीन दिसम्बर तक चलने वाले इस दो दिवसीय जल सम्मेलन का आयोजन जल-जन जोड़ो अभियान एवं बुंदेलखण्ड की सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वाधान में किया गया है।
   जल सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और जलपुरूष के नाम से विख्यात श्री राजेन्द्र सिंह, प्रदेश की पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, घुमक्कड़ एवं अर्द्धघुमक्कड़ जनजाति कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती ललिता यादव, बुंदेलखण्ड विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री श्री रामकृष्ण कुसमरिया, प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री विजयबहादुर सिंह बुंदेला, जिला पंचायत छतरपुर के अध्यक्ष श्री राजेश प्रजापति, चंदला विधायक श्री आरडी प्रजापति सहित जल सम्मेलन के लिए विशेष रूप से देश के विभिन्न प्रांतो से पधारे प्रमुख वक्ता (वाटर एक्सपर्ट फ्राम चेन्नई) श्री गुरूस्वामी, डॉ. राजेन्द्र पोद्दार, कृषि नीति आयोग में सलाहकार श्री जे.पी. मिश्रा, छतरपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रियव्रत शुक्ला के अलावा जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले विभिन्न शासकीय व गैर शासकीय संगठनों के सभी पदाधिकारी, जल संरक्षण कार्यकर्ता, जलयोद्धा सहित बुंदेलखण्ड क्षेत्र के सभी जिलों से आए ग्रामीणजन मौजूद थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस मौके पर कहा कि जल हमारे जीवन का प्राण है। जल के बिना इस धरा पर जीवन की कल्पना भी बेमानी है। पंच महाभूतों में केवल जल की हर बूंद में ही जीवन समाया हुआ है। इसलिए हम सभी को जल की बूंद-बूंद बचाने के लिए अभी से जागना जरूरी है। अन्यथा हम अपने सुनहरे भविष्य के सपनों को साकार नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि हम पूरे प्रदेश को देश के एक पानीदार प्रदेश के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बुंदेलखण्ड क्षेत्र में हर दूसरे, तीसरे साल में कम वर्षा होने की स्थिति पर अपनी गहन चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हम बुंदेलखण्ड क्षेत्र में अधिक से अधिक छोटे-बड़े नए तालाब, चौक डैम्स, स्टाप डैम्स, नालों का निर्माण और बोरी बंधान के कार्य कराएंगे। सूखती नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए हर जरूरी प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले ग्रीष्मकाल में पूरे बुंदेलखण्ड क्षेत्र में जल संरक्षण के कार्य और वर्षाकाल में अधिक से अधिक पौधरोपण के कार्य कराए जाएंगे। इससे वर्षाजल रूकेगा और प्यासी धरती की प्यास बुझेगी। इससे भूमि में नमी बनी रहेगी और फसल की पैदावार भी अच्छी होगी। इससे क्षेत्र का किसान खुशहाल होगा।
    
सम्मेलन में मौजूद जलपुरूष श्री राजेन्द्र सिंह द्वारा अपने संबोधन में श्री चौहान से खजुराहो में जल विश्वविद्यालय खोलने की मांग रखे जाने के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में जो निर्णय और सुझाव मिलेंगे उन पर कार्ययोजना बनाकर कार्य किया जाएगा। इस कार्ययोजना पर वर्ष 2018 की पहली तिमाही से ही अमल प्रारंभ कर दिया जाएगा। मुख्यंमंत्री श्री चौहान ने बताया कि सरकार के समर्पित प्रयासों से प्रदेश में सिंचित कृषि क्षेत्र का रकबा बढ़कर अब 40 लाख हेक्टेयर हो गया है। बीते 12-13 साल पहले यह रकबा मात्र 7.50 लाख हेक्टेयर ही था। हमने जल संरक्षण को अपनी प्राथमिकता में रखकर काम किया। परिणाम अब सबके सामने हैं। उन्होंने कहा कि बुंदेलखण्ड को जल संकट से निजात दिलाने के लिए इस क्षेत्र के हर गांव में एक-एक तालाब बनाने की जरूरत है। सरकार इसका बीड़ा उठाएगी। परंतु समाज के हर व्यक्ति के भरपूर सहयोग से ही सरकार का यह मिशन पूरा हो सकेगा। उन्होंने कार्यक्रम मे मौजूद सर्वजनों को पूरे प्राण-प्रण से जल बचाने को संकल्प दिलाया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान की घोषणाएं
1. सागर संभाग के सभी जिलों में मौजूद सभी छोटे-बड़े तालाबों का सीमांकन किया जाएगा।
2. इन तालाबों में सभी प्रकार के अतिक्रमण हटाएं जाएंगे।
3. गांव-गांव में नए तालाब बनाने के लिए भूमि चिंन्हित की जाएगी।
4. शासन और प्रशासन के सभी लोग नए तालाब खोदने के कार्य में श्रमदान
करेंगे। वे स्वयं भी श्रमदान करने आएंगे।
5. जल संरक्षण के लिए आगामी ग्रीष्मकाल में वृहद अभियान चालाया जाएगा।
6. अधिक से अधिक नए तालाब, चौक डैम, स्टाप डैम, नाले बनाने के अलावा बोरी
बंधान कार्य भी किए जाएंगे।
      कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जलपुरूष श्री राजेन्द्र सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश में नीर, नारी और नदी का सम्मान किया। आपने समाज को प्रकृति और इससे जुड़े सरोकारों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि इस जल सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री चौहान का खजुराहो आना ही बुंदेलखण्ड क्षेत्र और जल संरक्षण के प्रति उनकी संवेदनशीलता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व की जलवायु में दिनों-दिन हो रहे परिवर्तन से हम सब विकट स्थिति में पहुंच गए हैं। धरती का पेट खाली है। हमारे 72 प्रतिशत भू-जल भण्डार खाली है। हम धरती का पेट भरेंगे, तभी धरती हमारा पेट भरेगी। इसलिए हमें अपने सूखी धरती की प्यास बुझाना होगा। सूखती-मरती नदियों और तालाबों को पुनर्जीवित करना होगा। भू-जल संरक्षण के लिए हर जरूरी उपाय करने होंगे। अपनी नदियों और तालाबों को अतिक्रमण, प्रदूषण और अंधाधुंध शोषण से बचाना होगा। तभी हम अपनी भावी पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित रख पाएंगे।
     कार्यक्रम को अन्य प्रमुख वक्ताओं एवं जल विशेषज्ञों, जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे विषय विशेषज्ञों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जल कार्यकर्ता श्री संदीप पौराणिक का सम्मान किया। कार्यक्रम में कमिश्नर सागर श्री आशुतोष अवस्थी, कलेक्टर श्री रमेश भण्डारी सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी मौजूद थे।
(13 days ago)
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