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तेजस्वनी महिला स्व-सहायता समूहों को मसूर का बीज निःशुल्क वितरित
कम पानी से होगा उत्पादन
टीकमगढ़ | 11-नवम्बर-2017
 
 
    भारत सरकार की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के माध्यम से टीकमगढ़ जिले की 600 महिला किसानों को 110 क्विंटल निःशुल्क मसूर बीज का वितरण किया गया। इस संबंध में तेजस्विनी कार्यक्रम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री सुशील कुमार वर्मा द्वारा बताया गया कि इन्टरनेशनल सेन्टर फार एग्रीकल्चर रिसर्च इन ड्राई एरिया (इकार्डा) अम्लाहा सीहोर के सहयोग से टीकमगढ़ जिले में संचालित तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम अंतर्गत गठित स्वसहायता समूहों की 600 महिला एवं किसानों को 110 क्विंटल प्रमाणित मसूर बीज का वितरण गत दिवस पूर्व मंत्री म.प्र. शासन श्री हरिशंकर खटीक के आतिथ्य में इकाई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुरेन्द्र बारपेटे, श्री अरूण, तेजस्वनी जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री सुशील कुमार वर्मा द्वारा किया गया। ये बीज भारत सरकार की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के माध्यम से उपलब्ध कराये गये है जो कि 600 महिला किसानों को 110 क्विंटल निःशुल्क मसूर बीज का वितरण किया गया।
    ज्ञातव्य है कि म.प्र. शासन द्वारा टीकमगढ़ जिले को सूखा ग्रस्त घोषित किया गया है। इस वर्ष भी जिले में सामान्य से बहुत कम बारिश हुई है, जिस कारण किसानों को अधिक पानी वाली फसलों को पैदा करने में काफी परेशानी हो रही थी, जिससे लोग पलायन करने को मजबूर थे। इस समस्या से निजात पाने हेतु तेजस्विनी कार्यक्रम द्वारा यह पहल की गई। कार्यक्रम अंतर्गत जिले में गठित तेजस्विनी महासंघ की महिला किसानों को मसूर बीज का वितरण किया गया। इकार्डा द्वारा प्रदाय यह बीज प्रमाणित एवं उत्तम किस्म का है, जिसमें आरव्हीएल-31 एवं आईपीएल-316 वैरायटी प्रदान की गई है। बहुत ही कम पानी में इसकी पैदावार की जायेगी। इस हेतु इकार्डा के वरिष्ठ साइन्टिस्ट डॉ. बारपेटे तथा श्री अरूण ने महिलाओं को दवाईयों के माध्यम से बीज को उपचारित करने का तरीका भी बताया। यह बीज प्रेरणा तेजस्विनी महिला महासंघ बम्हौरीकला, एवं नारीशक्ति तेजस्विनी महिला महासंघ मड़िया में कार्यक्रम आयोजित कर महिलाओं को प्रदाय किया गया। महिलाओं ने इस मसूर बीज की बोनी अपने-अपने खेतों में प्रारंभ कर दी है।
    इस संबंध में तेजस्विनी कार्यक्रम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री सुशील कुमार वर्मा द्वारा बताया गया कि राज्य कार्यक्रम इकाई भोपाल के मार्गदर्शन उपरांत इन महिला किसानों को इकार्डा संस्था का एक्सपोजर विजिट भी कराने का जिले द्वारा प्रयास किया जायेगा, ताकि जिले में इस फसल का उत्पादन अच्छी तरह हो सके। मसूर दाल उत्पादन होने से महिलाओं को दाल का बाजार में अच्छा भाव नहीं मिलेगा।
    उल्लेखनीय है कि जनवरी 2017 में तेजस्वनी कार्यक्रम से जुड़ी महिलाओं का एक्सपोजर विजिट अमलाहा जिला सीहोर में किया गया था। जहां महिलाओं को उन्नत कृषि की तकनीकी से अवगत कराया गया था। इकार्डा को भी तेजस्विनी कार्यक्रम का कार्य पसंद आया और यह अंतर्राष्ट्रीय संस्था तेजस्विनी कार्यक्रम से जुड़ी महिलाओं की मदद के लिये आगे आई। इससे पूर्व इकार्डा ने सूखा क्षेत्र में पशु चारे के लिये विशिष्ट किस्म के केक्टस की प्रायोगिक खेती टीकमगढ़ में प्रारंभ कराई गई है।
 
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