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स्वसहायता समूह ने भागवती के परिवार की बदली जिंदगी "सफलता की कहानी"
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शिवपुरी | 12-अक्तूबर-2017
 
  
   ग्राम कमरौआ के श्रीमती भागवती चंदेल का परिवार स्वसहायता समूह जुड़ने से पहले मजदूरी पर निर्भर था। मजदूरी भी अन्य गांव में जाकर करना पड़ती थी। जिसे वह मुश्किल से 50 से 100 रूपए मजदूरी मिल पाती थी। भागवती चंदेल ‘‘संतोषी स्वसहायता समूह’’ से सदस्य के रूप में जुड़ी। जिसका विरोध उनके पति द्वारा किया गया। लेकिन भागवती के अटल इरादों के कारण उनके पति का विरोध अधिक समय तक नहीं ठहर सका।
   श्रीमती भागवती ने स्वसहायता समूह के सदस्य के रूप में 10 रूपए प्रति सप्ताह समूह में बचत करना शुरू किया। धीरे-धीरे यह राशि बढ़ने लगी। प्रथम ऋण समूह के माध्यम से 15 हजार रूपए की राशि ऋण के रूप में लेकर अपने बेटे की दुकान शुरू कराई। भागवती द्वारा ली गई ऋण की राशि व्याज सहित समूह को नियमित जमा कर रही है। संतोषी स्वसहायता समूह से जुड़ने से भागवती के परिवार में बदलाव आना शुरू हुआ। उनके बेटे की दुकान से प्रतिमाह छह से आठ हजार रूपए की अतिरिक्त आमदनी हो रही है और बेटे को भी रोजगार मिला है। आर्थिक स्थिति में सुधार को देखते हुए अब उनके पति का भी रूझान सकारात्मक हो गया है। उनके पति सीएलएफ के पद पर कार्य कर 4 हजार 200 रूपए प्रतिमाह कमा रहे है। इतना ही नहीं भागवती ने गांव में दो बीघा जमीन ठेके पर लेकर टमाटर की खेती भी करना शुरू कर दी है। जिससे उसे 20 हजार रूपए का लाभ मिला। इस प्रकार भागवती 6 लाख रूपए समूह से ऋण के रूप में ले चुकी है और व्याज सहित नियमित रूप से ऋण की किस्ते भी जमा कर रही है। भागवती द्वारा 05 दिवसीय ग्राम ज्योंति का प्रशिक्षण प्राप्त कर अब वे दूसरे गांव एवं जिलों में स्वसहायता समूह बनाने के प्रशिक्षण भी दे रही है। उनके द्वारा लगभग 102 ग्रामों में 420 समूहों का गठन कराया गया है। इन समूहों के गठन से उन्हें मानदेय के रूप में 10 हजार से अधिक की राशि प्राप्त हुई है। आज समाज में उनकी मान एवं प्रतिष्ठा भी बढ़ी है।
   गत दिनों जनपद पंचायत कोलारस में खण्डस्तरीय अंत्योदय मेला में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री एवं जिले के प्रभारी श्री रूस्तम सिंह ने श्रीमती भागवती चंदेल द्वारा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्य से प्रभावित होकर 11 हजार रूपए की पुरस्कार राशि देने की घोषणा की।  
 
 
 
 
(97 days ago)
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