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लोक अदालत के माध्यम से एक ही दिन में सैकडो़ प्रकरणों का निराकरण-डीजे
मॉ सरस्वती की पूजा अर्चना के उपरांत नेशनल लोक अदालत का उदघाटन
भिण्ड | 09-सितम्बर-2017
 
   जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भिण्ड श्री तारकेश्वर सिंह ने मॉ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ आज जिला न्यायालय स्थित मीडिऐशन सेन्टर के सभागार में किया गया।
   इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश श्री योगेश कुमार गुप्ता, प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री उमेश पाण्डव, द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. कुलदीप जैन, पंचम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री मो. शकील खान, तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री धनराज दुबेला, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी श्री पवन कुमार बांदिल, बार एशोशिएशन के अध्यक्ष श्री नरेन्द्र चौधरी, प्रथम व्यावहार न्यायाधीश वर्ग-2 श्री संकर्षण प्रसाद पाण्डेय, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री विकास शुक्ला, द्वितीय व्यावहार न्यायाधीश वर्ग-2 श्री ज्ञानेन्द्र शुक्ला, द्वितीय व्यावहार न्यायाधीश वर्ग-2 श्रीमती तृप्ती पाण्डेय, ट्रेनीज जज सुश्री रेनू खांन, श्री शरद जयसवाल, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री बीके जैन, अभिभाषक, पत्रकार, सुलहकर्ता सदस्य एवं पक्षकार उपस्थित थे।
   जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भिण्ड श्री तारकेश्वर सिंह ने उदघाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आपसी सुलह और समझौता के आधार पर पीठासीन अधिकारियों की गठित की गई खण्डपीठो के माध्यम से अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण इस लोक अदालत में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशो की गठित खण्डपीठो के माध्यम से प्रस्तुत प्रकरणों का निराकरण करने में सुलहकर्ता और पक्षकारों की महति भूमिका है। जिनके माध्यम से अधिक से अधिक प्रकरण निराकृत किए जा रहे है। इन प्रकरणों के निराकृत होने से विवाद समाप्त होता है। साथ ही सकारात्मक सोच के साथ अन्तर आत्मा से सुलह एवं समझौते का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि विगत लोक अदालत के माध्यम से 300 प्रकरणों का निराकरण एक ही दिन में किया गया था। इसलिए हर दो माह में आयोजित होने वाले नेशनल लोक अदालत के माध्यम से एक ही दिन में सैकड़ो प्रकरणों का निराकरण की सुविधा मुहैया कराई जावेगी। आज आयोजित लोक अदालत में भी सैकड़ो प्रकरण गठित खण्डपीठो के माध्यम से निराकृत होंगे।
   डीजे ने कहा कि नेशनल लोक अदालत में प्रकरण निराकरण में जीत-हार नहीं होती है। साथ ही आपसी संबंध मधुर बनते है। शत्रुता समाप्त होती है। इसी प्रकार प्रकरण की अपील नहीं होती है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में हत्या जैसे प्रकरण अधिकतर सामने आते है। जिनको रोकने के लिए सोशल टच देने की आवश्यकता है। साथ ही एक दूसरे को उकसाने में भी बेचारिक स्तर में भी परिवर्तन लाना आवश्यक है। जिससे अपराधो में काफी कमी आएगी।
   द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. कुलदीप जैन ने इस अवसर पर कहा कि नेशनल लोक अदालत के माध्यम से अच्छी भावना के साथ मिलजुलकर प्रकरणों का निराकरण करने से कोर्ट फीस से मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि आपसी सुलह और समझौता के माध्यम से द्विवेश की भावना समाप्त होती है। इसलिए पूर्व तैयारी के साथ लोक अदालत में प्रकरण प्रस्तुत किए जाकर उनके निराकरण की पहल हम सभी को करना चाहिए।
   मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी श्री पवन कुमार बांदिल ने नेशनल लोक अदालत के शुभारंभ अवसर पर कहा कि प्रकरणों के निराकरण में पक्षकारों की महति भूमिका है। जिनके माध्यम से राजीनामा के आधार पर अधिक से अधिक पुराना भी प्रकरण निराकरण करने में सुविधा मिलती है। उन्होंने कहा कि नेशनल लोक अदालत का आयोजन हर दो माह में किया जा रहा है। जिससे अधिकतर राजीनामा योग्य प्रकरण निराकरण होगे।
   बार एशोशिएशन के अध्यक्ष श्री नरेन्द्र चौधरी ने उदघाटन समारोह में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने में नेशनल लोक अदालत की महति आवश्यकता है। इसलिए न्यायालय में प्रचलित प्रकरणों का निराकरण करने के लिए हम सभी को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेशनल लोक अदालते प्रकरणों का निराकरण करने में मील का पत्थर साबित हो रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता श्री जयश्री राम बघेल एवं सूरज रेखा त्रिपाठी ने नेशनल लोक अदालत के उदघाटन समारोह में अपने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री बीके जैन ने किया।
नेशनल लोक अदालत के माध्यम से प्रकरणों के निराकरण की पहल
   जिला एवं सत्र न्यायाधीश मा. श्री तारकेश्वर सिंह के नेतृत्व में आयोजित नेशनल लोक अदालत में आपराधिक, दीवानी, विद्युत अधिनियम के लंबित एवं प्रिलिटिगेशन प्रकरण, श्रम, मोटर दुर्घटना दावा, प्रिलिटिगेशन एवं पेडिंग, निगोशिएबल इंस्ट्रूमेन्ट एक्ट के अन्तर्गत चैक बाउन्स प्रकरण, कुटुम्ब न्यायालय, उपभोक्ता फोरम, प्लीबारगेनिंग, विड्रावल क्रिमीनल केसेस (एफ.आर), क्रिमिनल समरी, नगर पालिका, बैंक एवं अन्य समस्त प्रकार के प्रिलिटिगेशन और विभिन्न न्यायालयों में प्रचलित प्रकरणों का निराकरण करने की पहल की गई है।  
 
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