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"बच्चे देश का भविष्य हैं, इन्हें कुपोषण से बचायें"
नवजात शिशु व माताओं को पौष्टिक व संतुलित आहार दिया जाए, राष्ट्रीय पोषण सप्ताह पर सेमिनार व मीडिया कार्यशाला आयोजित
उज्जैन | 04-सितम्बर-2017
 
   
   बच्चे आने वाले देश का भविष्य है इसलिए इन्हें कुपोषण से बचाया जाए। नवजात शिशु व माताओं को पौष्टिक व संतुलित आहार दिया जाना बेहद जरूरी है। किसी भी बिमारी से बचाव उसके इलाज से कई ज्यादा बेहतर होता है। उक्त विचार सोमवार को राष्ट्रीय पोषण सप्ताह पर एकीकृत बाल विकास सेवा एवं कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त तत्वाधान द्वारा बृहस्पति भवन में आयोजित सेमीनार और मीडिया कार्यशाला में व्यक्त किये गये।
   इस कार्यशाला में जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सीएल पासी, सहायक संचालक एकीकृत बाल विकास सेवा श्री राजीव गुप्ता, कृषि विज्ञान केंद्र की वेज्ञानिक डॉ. रेखा तिवारी, जीडीसी कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. सविता खरे, डिस्ट्रीक्ट रिसोर्स ग्रुप की डॉ. अपरा विजयवर्गीय, सभी सीडीपीओं, बीडब्लूईओ, पर्यवेक्षक और पत्रकार मौजद थे।
   उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय पोषण सप्ताह 1 से 7 सितंबर तक मनाया जाएगा। इस हेतु समस्त सीडीपीओ और पर्यवेक्षकों को कार्यशाला के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया । साथ ही कुपोषण से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। कुपोषण पर आमजन में प्रचलित विभिन्न भ्रातियों पर भी प्रकाश डाला गया। कार्यशाला में बताया गया कि भारत में कुपोषण के कारण बच्चों में कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां व समस्याएं आती है। बाल मृत्यु को कम करने के लिए जन्म के छ: माह तक केवल मॉ का दूध देना एक बहुत ही कारगर कदम है। इसके साथ ही बच्चे को सारे पौष्टिक तत्व प्राप्त होते हैं। इसके पश्चात छ: माह के बाद बच्चे को कौन सा आहार दिया जाना चाहिए और उसके क्या क्या लाभ है इस पर भी कार्यशाला में पॉवर पांईट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विशेषज्ञों द्वारा बताया गया ।
   बच्चों को उम्र के अनुसार पर्याप्त गुणवत्ता, मात्रा का निरंतर आहार प्रदाय किये जाने, आहार की तरलता, उसकी मात्रा और पर्याप्त गाढ़े पन वाले उपरी आहार दिये जाने पर चर्चा की गई। इसके साथ ही उन्हें मौसमी फल और सब्जियां भी निर्धारित मात्रा में खिलाने के तरीकों के बारे में बताया गया। विशेषज्ञों द्वारा बताया गया कि हरी व पत्तेदार सब्जियां संपूर्ण मात्रा में बच्चों और गर्भवती माताओं को खिलायी जाएं, इसके साथ ही छोटे बच्चों को भोजन कराते समय स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखा जाए।
   डॉ. सीएल पासी ने कहा कि अगली पीढ़ी के बच्चों को जन्म देने वाली माताओं का गर्भावस्था के दौरान विशेष ध्यान रखा जाना जरूरी है। वर्तमान में लोगों के खानपान के तरीकों मे कॉफी बदलाव आया है। इसलिए शिशु व माता को संतुलित आहार उपलब्ध करवाना बेहद जरूरी है।
   श्री राजीव गुप्ता ने बताया कि लोगों में यह भ्रांति है कि गरीब परिवार के बच्चे ही कुपोषित होते है परंतु ऐसा नही है। वर्तमान में समझदार पढ़ेलिखे और आर्थिक रूप से संपन्न परिवार के बच्चें भी कुपोषण के शिकार हो सकते है। इसिलिए लोगों को अपने बच्चों को पोष्टिक आहार देना चाहिए तथा बाजार में मिलने वाले फास्ट फूड और डिब्बा बंद खाद्य पदार्थो से बच्चों को दूर रखना चाहिए।
   डॉ. रेखा तिवारी ने कहा कि छोटे व टूटते हुए परिवारों के कारण बच्चों को संपूर्ण पोषण नही मिल पा रहा है इसलिए इस ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके साथ ही गर्भवती माताओं को सौ दिनों तक प्रतिदिन दी जाने वाली आयरन की गोलियां दूध के साथ नही दी जानी चाहिए। क्योंकि दूध में मौजूद केल्शियम और आयरन का मेल ठीक नहीं होता है।
(81 days ago)
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