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महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक स्तर पर सशक्तिकरण के विशेष प्रयास
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उज्जैन | 05-फरवरी-2017
 
   
        प्रदेश में महिलाओं के आत्म सम्मान की रक्षा और उन्हें अधिकार सम्पन्न बनाने के लिये महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक स्तर पर सशक्तिकरण किये जाने के प्रयास शासन द्वारा जारी हैं, ताकि महिलाएं अपने मौलिक अधिकारों का उपयोग करते हुए विकास के क्षेत्र में योगदान देकर स्वयं भी सक्षम बन सकें।
स्वागतम लक्ष्मी योजना
        इस योजना का मुख्य उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह, दहेज प्रथा, लिंग भेदभाव को समाप्त करना एवं महिलाओं के प्रति सम्मानजनक, सकारात्मक सोच और गरिमा को बढ़ाना है। इस योजना के तहत लक्ष्य समूह माता के गर्भ में पल रहा शिशु, नवजात बालिकाएं, विद्यालय-महाविद्यालय में जाने वाली प्रत्येक बालिका, घरेलू कामकाजी महिलाएं, विभिन्न शासकीय, अशासकीय कार्यालयों में कार्यरत महिलाएं व पंचायत, नगरीय विकास एवं अन्य समस्त जनप्रतिनिधि हैं। इस योजना के तहत महिलाओं के प्रति किये जाने वाले व्यवहार में परिवर्तन करना, पीसी एण्ड पीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन और मीडिया संवेदनशीलता की दिशा में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना है। स्कूल, उच्च शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग में महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच बढ़ाने के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। महिलाओं के उत्पीड़न एवं घरेलू हिंसा अधिनियम-2005 नियम-2006 के तहत कार्यक्रमों का आयोजन, शौर्य दलों का गठन व दहेज जैसी बुराई के विरूद्ध जागरूकता अभियान चलाये जाते हैं।
बेटी बचाओ अभियान
        घटते हुए शिशु लिंगानुपात को देखते हुए चलाये गये बेटी बचाओ अभियान से समाज के समस्त वर्गों का जुड़ाव हो रहा है। इसके लिये 60 वर्ष से अधिक ऐसे दम्पत्ति के लिये, जिनकी केवल बेटियां हैं, उन्हें कन्या अभिभावक पेंशन योजना के तहत लाभान्वित किया जा रहा है। शहरी क्षेत्र में नगरीय निकाय और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत विभाग नोडल एजेन्सी है।
उषा किरण योजना
        घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिये बनाये गये घरेलू हिंसा अधिनियम-2005 के नियम-2006 के प्रावधान के अनुसार महिला के विरूद्ध होने वाली घरेलू हिंसा से महिलाओं को न्यायिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उषा किरण योजना प्रारम्भ की गई है। घरेलू हिंसा यानी ऐसा कार्य या हरकत जो किसी पीड़ित महिला एवं बच्चों (18 वर्ष से कम उम्र के बालक/बालिका) के स्वास्थ्य सुरक्षा, जीवन को खतरा/संकट की स्थिति, आर्थिक नुकसान जो असहनीय है तथा जिससे महिला एवं बच्चे दु:खी एवं अपमानित होते हैं। इसके तहत शारीरिक हिंसा, मौखिक व भावनात्मक हिंसा, लैंगिक व आर्थिक हिंसा या धमकी देना शामिल है।
        घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाएं अपनी शिकायत क्षेत्र के बाल विकास परियोजना अधिकारी को कर सकती हैं, जिन्हें राज्य शासन द्वारा संरक्षण अधिकारी घोषित किया गया है। शिकायत का परीक्षण कर परियोजना/संरक्षण अधिकारी महिला को न्याय दिलाने हेतु न्यायिक मजिस्ट्रेट को प्रकरण प्रस्तुत करेंगे व जिले के लिये घोषित आश्रय गृह में पीड़ित को नि:शुल्क आवासीय/भोजन आदि की सुविधा उपलब्ध होगी।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006
        बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 को 10 जनवरी 2007 से अधिसूचित किया गया है। इस कानून का मकसद बाल विवाह प्रथा की असरदार रोकथाम में पहले के कानून की विफलता को पार पाना और बाल विवाह की रोकथाम के लिये समग्र व्यवस्था विकसित करना है। बाल विवाह की पुलिस/जिला मजिस्ट्रेट व प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट को शिकायत की जा सकती है। बाल विवाह एक दण्डनीय अपराध है, जिसके लिये कोई भी 18 वर्ष से कम आयु की बालिका तथा 21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह करता है अथवा उसे प्रोत्साहित करता है, तो उसे दो वर्ष की कड़ी कैद या एक लाख रूपये का दण्ड अथवा दोनों हो सकते हैं।
जननी सुरक्षा योजना
        जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को प्रसव चिकित्सालय में करवाने पर जच्चा एवं बच्चा को पौष्टिक खाद्य एवं अन्य व्यय की पूर्ति हेतु भारत शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्र की महिला को 1400 और शहरी क्षेत्र की महिला को एक हजार रूपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
लाड़ली लक्ष्मी योजना (ई-लाड़ली)
        बालिका जन्म के प्रति जनता में सकारात्मक सोच, लिंगानुपात में सुधार, बालिकाओं के शैक्षणिक स्तर व स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार और उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश में विगत एक अप्रैल 2007 से लाड़ली लक्ष्मी योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत लाभ लेने हेतु आवश्यक दस्तावेजों के साथ सीधे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से, परियोजना कार्यालय, लोक सेवा केन्द्र अथवा किसी भी इंटरनेट कैफे से आवेदन अथवा रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है। प्रकरण स्वीकृति के लिये समस्त दस्तावेजों का परीक्षण परियोजना कार्यालय से करवाना होता है। तत्पश्चात प्रकरण स्वीकृत अथवा अस्वीकृत किया जा सकता है। प्रकरण स्वीकृति के उपरान्त बालिका के नाम से शासन की ओर से एक लाख 18 हजार रूपये का प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है।
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