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डेयरी उद्योग को दिया जाय बढ़ावा
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सीधी | 12-जनवरी-2017
 
   
   सीधी जिले में डेयरी उद्योग की अपार संभावनाएं हैं। जिले में दूध की काफी मांग है। अतः पशु चिकित्सा विभाग जिले में डेयरी फार्म विकसित करने के लिए सशक्त रणनीति बनाए और उस दिशा में काम करे। युवा उद्यमी योजना के अंतर्गत डेयरी उद्योग की स्थापना के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर बैंक के माध्यम से इच्छुक व्यक्तियों को ऋण सुविधा दिलवाएं। डेयरी की सफलता के लिए आवश्यक है कि एक डेयरी यूनिट के लिए 100-100 उन्नति प्रजाति की भैंस दी जाय। उक्त निर्देश कलेक्टर अभय वर्मा ने दिया। वे आज कृषि विभाग, पशु चिकित्सा, मत्स्यपालन, रेशमपालन, उद्यानिकी विभाग के प्रगति की समीक्षा कर रहे थे।
   बैठक में कृषि विभाग के उपसंचालक कमलेश कुमार पाण्डेय, पशु चिकित्सा के उप संचालक डॉ. एम.पी.गुप्ता, म.प्र. एग्रो के डी.पी.सिंह, आत्मा परियोजना के संजय श्रीवास्तव, मत्स्य पालन के सहायक संचालक श्री पटेल एवं रेशम के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
   कलेक्टर श्री वर्मा ने कहा कि डेयरी फार्म का प्रोजेक्ट तैयार करते समय जबलपुर में स्थापित डेयरी उद्योग पैटर्न पर प्रोजेक्ट तैयार किया जाय तथा हितग्राही को कम से कम सौ-सौ भैंस अनिवार्य रूप से दी जाय ताकि उसके शतप्रतिशत सफलता की संभावना हो। इसी प्रकार से युवा उद्यमी योजना के अंतर्गत कुछ हितग्राहियों को पोल्टीफार्म की स्थापना कराई जाय तथा प्रत्येक पोल्टीफार्म को 5-5 सौ चूजे दिए जांय ताकि यूनिट शतप्रतिशत सफल हो। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले में पदस्थ शतप्रतिशत 14 पशु चिकित्साधिकारियों को 2-2 डेयरी फार्म एवं पोल्टीफार्म स्थापना का लक्ष्य दिया जाय।
   कलेक्टर ने उद्यान विभाग के प्रगति की समीक्षा के दौरान बताया कि जिले में 50 मेट्रिक टन क्षमता के 22 भण्डारगृह का निर्माण किया जाना था इसके विरूद्ध विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान 12 भण्डारगृह और वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान 22 के लक्ष्य के विरूद्ध 30 भण्डारगृहों का निर्माण कराया है। इसी प्रकार 25 मैट्रिक टन क्षमता के 5 भण्डारगृह लक्ष्य के विरूद्ध 8 भण्डारगृहों का निर्माण पूर्ण करा लिया है। विभाग द्वारा आगामी 5 वर्षों में उद्यानिकी क्षेत्र विस्तार योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान फलों के 2577 हेक्टेयर लक्ष्य के विरूद्ध 2790 हेक्टेयर सब्जी के 13925 हेक्टेयर के विरूद्ध 16710 हेक्टेयर मसाला के 1710 हेक्टेयर के विरूद्ध 2 हजार 52 हेक्टेयर, पुष्प के 50 हेक्टेयर के विरूद्ध 180 हेक्टेयर औषधीय पौधों के 150 हेक्टेयर लक्ष्य के विरूद्ध 180 हेक्टेयर एवं ड्रिप के 1100 हेक्टेयर लक्ष्य के विरूद्ध 1 हजार 300 हेक्टेयर क्षेत्र में सिचाई सुविधा का विस्तार किया है।
   कलेक्टर श्री वर्मा ने कृषि विभाग के प्रगति की समीक्षा के दौरान निर्देष दिए कि कृषकों की 5 वर्ष में आय दुगुनी करने के लिए कृषि उत्पादकता बढ़ाने हेतु प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाय और प्रतिवर्ष 20-20 प्रतिशत उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य सुनिश्चित किया जाय। समीक्षा के दौरान बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान 21 हजार 500 मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण का लक्ष्य प्राप्त हुआ था प्राप्त लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 22 हजार 414 मृदास्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। जीरो टिल ड्रिल कम उर्वरक मशीन से बुबाई का 250 लक्ष्य के विरूद्ध 275 टिल ड्रिल मशीन से बुबाई की गई है। जैव उर्वरक उपयोग का 300 लक्ष्य के विरूद्ध 325 क्विंटल जैव उर्वरक का उपयोग किया गया। रोटावेटर के एक हजार के लक्ष्य के विरूद्ध 1 हजार 150 रोटावेटर का उपयोग किया गया।
   उन्होंने निर्देश दिए कि कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से उत्पादकता बढ़ाने हेतु प्रोत्साहन देने के साथ ही कृषकों को कृषि यंत्रीकरण के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाय। समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि सीड कम फर्टिलाईजर ड्रिल के वितरण के 40 के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 80 किसानों को सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल का वितरण किया गया। रीज व फरो पद्धति से बुबाई के 2 हजार 73 लक्ष्य के विरूद्ध 2 हजार 125 हेक्टेयर क्षेत्र में बुबाई की गई हैं। गहरी जुताई के 2 हजार हेक्टेयर क्षेत्र के लक्ष्य के विरूद्ध 3 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बुबाई की गई है। जिले में 11 कस्टम हाइरिंग केन्द्रों की स्थापना की गई हैं। कलेक्टर ने मत्स्य एवं रेशम विभाग के प्रगति की समीक्षा भी की।
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