समाचार
|| रामेश्वरम् तीर्थ दर्शन यात्रा 25 दिसम्बर को || भावांतर राशि भुगतान के लिए समिति गठित || अरहर उपार्जन का शेष भुगतान शीघ्र करने के कलेक्टर ने दिए निर्देश || लगता है कि किसी प्ले स्कूल में आ गए (सफलता की कहानी) || प्रगतिशील कृषक भी खुश है भावांतर योजना में मिल रहे लाभ से (सफलता की कहानी) || जिला पंचायत सीईओ श्री भार्गव ने की जनसुनवाई || पीएम श्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इण्डिया की राह पर किसान (सफलता की कहानी) || स्वसहायता समूह से जुड़कर हुआ सपना साकार (सफलता की कहानी) || मुख्यमंत्री श्री चौहान श्री अतुल राय के निवास पर सौजन्य भेंट करने पहुँचे || मुख्यमंत्री श्री चौहान अल्प प्रवास पर ग्वालियर आए
अन्य ख़बरें
कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में जिले का नाम रोशन करेगा जयप्रकाश
-
बालाघाट | 03-जनवरी-2017
 
     बालाघाट जिले के छोटे से गांव पिपरिया के एक किसान परिवार के होनहार युवक जयप्रकाश ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली में वैज्ञानिक के पद पर चयनित होकर बालाघाट जिले का नाम रोशन किया है। बालाघाट जिले का यह युवा कृषि अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अनुसंधान का कार्य पूर्ण करने के बाद अब देश के किसानों एवं खेती को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।
     लालबर्रा तहसील के ग्राम पिपरिया (छिंदलई) के निवासी जयप्रकाश बिसेन ने हायर सेकेंडरी तक की शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय वारासिवनी से हासिल की है। इसके बाद उसने आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय हैदराबाद से बी.एस-सी.(कृषि) और चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्व विद्यालय हरियाणा से एम.एस-सी.(कृषि) किया है। जय प्रकाश ने भारतीय कृषि अनुसंधन परिषद नई से जुनियर रिसर्च फैलोशिप (जेआरएफ) के लिए चयनित होकर एम.एस-सी. (कृषि) सामाजिक विज्ञान में विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान हासिल किया है। उसने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली से सीनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए अखिल भारतीय स्तर पर चतुर्थ रैंक हासिल किया था और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली से पी.एच-डी. प्रवेश परीक्षा में सम्पूर्ण देश में तृतीय रैंक हासिल किया था।
     जयप्रकाश बिसेन की फल एवं सब्जी की बाजारों में आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन एक तुलनात्मक विश्लेषण पर पी.एच-डी. का कार्य लगभग पूर्ण हो गया है और उसका चयन भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में नई दिल्ली में वैज्ञानिक के पद पर हो गया है। जयप्रकाश ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने पिता श्री गुरूप्रसाद बिसेन एवं माता श्रीमती शुसन बिसेन को दिया है। पिता शासकीय नौकरी में नहीं थे इसके बाद भी उन्होंने अपनी कृषि आय के दम पर उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। वैनगंगा नदी के किनारे बसे गांव पिपरिया के रहने वाले जयप्रकाश की रूचि प्रारंभ से ही कृषि में रही है। स्कूल एवं कालेज से जब भी लंबा अवकाश मिलता था वह खेती में अपने पिता का हाथ बंटाने के लिए पहुंच जाता था। जयप्रकाश का कहना है कि मन में दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो अभावों में रहकर भी सफलता हासिल की जा सकती है।
(343 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
नवम्बरदिसम्बर 2017जनवरी
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
27282930123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
1234567

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer