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राज्य स्तरीय किसान मेला एवं पशु प्रतियोगिताओं का शुभारंभ
खेती किसानी के साथ पशु पालन भी किसानों की उन्नति के लिये आवश्यक - महापौर श्री शेजवलकर
ग्वालियर | 02-जनवरी-2017
 
  
   किसानों को आर्थिक उन्नति के लिये कृषि के साथ-साथ पशु पालन पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। किसानों के लिये कृषि और पशु पालन दोनों ही सिक्के के दो पहलू हैं। बिना पशुपालन के खेती किसानी को आय का साधन नहीं बनाया जा सकता। महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर ने यह बात ग्वालियर व्यापार मेला प्रांगण में सोमवार को राज्य स्तरीय किसान मेला एवं पशु प्रतियोगिताओं के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अभय चौधरी ने की। इस मौके पर संत कृपाल सिंह एवं संभागीय आयुक्त एवं मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस एन रूपला विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। गौपूजन के साथ प्रारंभ हुआ यह चार दिवसीय किसान मेला 6 जनवरी तक संचालित किया जायेगा।
   महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर ने कहा कि 100 वर्षों से अधिक पुराने इस मेले की ग्वालियर ही नहीं पूरे देश विदेश में पहचान है। पशु मेले के रूप में प्रारंभ होने के बाद यह मेला उत्तरोत्तर प्रगति करते हुए आज व्यापार मेले का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि मेले केवल सामग्री क्रय विक्रय का केन्द्र नहीं, बल्कि यह हमारी एतिहासिक सांस्कृतिक परंपराओं के पोषक भी होते हैं।
   कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अभय चौधरी ने कहा कि ग्वालियर का यह पशु मेला अपने 100 से अधिक वर्ष पूर्ण कर चुका है। ग्वालियर के पशु मेले में प्रदेश भर के पशु पालक आकर अपने पशुओं का प्रदर्शन और क्रय-विक्रय करते हैं। उन्होंने कहा कि पहले पशुपालन कोई आर्थिक समृद्धि का आधार माना जाता था। जिसके पास जितने अधिक पशु होते थे, वह व्यक्ति उतना ही धनाढ्य माना जाता था। उन्होंने कहा कि यह मेला किसानों के लिये और पशु पालकों के लिये जन आकर्षण का केन्द्र रहा है। इस मेले को और जन आकर्षक का केन्द्र बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका लाभ न केवल ग्वालियर के आसपास बल्कि प्रदेश भर के लोग उठायेंगे।
   कार्यक्रम में संत कृपाल सिंह ने कहा कि पशुधन में विशेषकर गाय हमारी धार्मिक आस्था का प्रतीक है। क्योंकि सभी पशुओं में गाय को अत्यधिक उपयोगी माना गया है। हिंदू दर्शन में यह भी माना जाता है कि गौ के स्पर्श मात्र से अनेक बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य पशुओं की सेवा ईश्वर की भक्ति से कम नहीं है।
   कार्यक्रम में ग्वालियर संभाग के आयुक्त एवं मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस एन रूपला ने कहा कि व्यापार मेले और पशु मेले को सुदृढ़ बनाने के लिये प्राधिकरण द्वारा व्यापारी व पशु पालकों के हित में अनेक निर्णय लिये हैं। पशु मेले में आने वाले पशु पालकों को बेहतर सुविधायें उपलब्ध हों, इस पर विशेष ध्यान दिया गया है। पशु मेले में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं का अधिक से अधिक पशु पालक लाभ उठायें। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि पशु मेले और प्रतियोगिताओं की जानकारी अधिक से अधिक किसानों को दें, ताकि वह इसका अधिक से अधिक लाभ उठा सकें।
   कार्यक्रम के प्रारंभ में संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा श्री एच सी रायकवार ने बताया कि पशु मेले में 03 जनवरी को गौ वंशीय प्रतियोगितायें आयोजित होंगी। 04 जनवरी को भैंस वंशीय प्रतियोगितायें तथा 05 जनवरी को कृषक एवं पशु पालक संगोष्ठी तथा बकरा-बकरी प्रतियोगितायें होंगी। 06 जनवरी को प्रात: 9 बजे डॉग शो और सर्वोत्तम पशु (राजा-रानी) का चयन के साथ ही प्रतियोगिताओं का समापन तथा पुरस्कार वितरण होगा।
   कार्यक्रम में एमपी एग्रो के श्री जोन मैथ्यू, व्यापार संघ के अध्यक्ष श्री महेश मुदगल, उपसंचालक पशु चिकित्सा श्री ओ पी त्रिपाठी, विभागीय अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक व बड़ी संख्या में पशुपालक उपस्थित थे।
(418 days ago)
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